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लेखनी प्रतियोगिता -23-May-2023 स्कूल के वो दिन


                  स्कूल के वो दिन

           नवीन आज एक बहुत बडे़ शोरूम का मालिक था। आज उसके पास नाम व पैसा दोनौ थे 

       नवीन के शोरूम में एक लड़की ने प्रवेश किया और वह अपने घर के लिए कुछ सामान खरीदने आई थी। नवीन को वह औरत जानी पहचानी सी लगी। वह अपने केविन से काउन्टर पर आया और अपने सामने रिया को देखकर आश्चर्य चकित होगया क्योकि रिया का चेहरा ही बदल गया था। वह बहुत कमजोर होगयी थी।

      एक बार तो नवीन को अपनी आँखो पर विश्वास ही नही होरहा था कि यह रिया है अथवा कोई और है। लेकिन नवीन रिया को कैसे भुला सकता था। एक जमाना था कि वह रिया की पद चापौ से ही बता देता था यह रिया है। फिर आज तो रिया उसके सामने खडी़ थी वह उसे पहचानने में कैसे गलती कर सकता था।

    इसके साथ ही नवीन उन स्कूल के पुराने दिनौ की मधुर यादौ में खोगया।

     नवीन को गाने का बहुत शौक था। उसके स्कूल में कोई भी प्रोग्राम होता तब नवीन का गाना अवश्य होता था। इस वर्ष उसके स्कूल में रिया नाम की लड़की ने एडमीशन लिया था। रिया की आवाज के बहुत ही कशीदे पढे़ जारहे थे।

       नवीन के दोस्त उससे कहने लगे ," बेटा अब ऊँट आयेगा  पहाड़ के नीचे अब तक तो तू अन्धौ में काना राजा था। अब तेरा कम्पटीशन रिया से होगा तब मालूम होगा कि कैसे गाया जाता है?"

      15 अगस्त का प्रोग्राम था । आज के प्रोग्राम के मुख्य अतिथि कोई मन्त्रीजी थे। आज नवीन के इम्तहान का दिन था। 

       सबसे पहले नवीन ने एक भक्ति गीत की प्रस्तुति दी। इसके बाद रिया ने लताजी का वह गीत प्रस्तुत किया जिसे सुनकर नेहरू जी भी अपनी आँखौ में पानी भर लाये थे। गाने के बोल थे:- ए मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भरलो पानी। जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुरवानी।।

         रिया की आवाज का जादू एसा चला कि मन्त्री जी ने रिया  को एक बडी़ गायक बनने का आशीर्वाद दिया।नवीन की आवाज का जादू भी खूब चला। उस दिन से रिया व नवीन एक दूसरे के दोस्त होगये।

        स्कूल से वह कालेज में पहुँच गये और उन दोनौ की दोस्ती धीरे धीरे न जाने कब प्यार में बदल गयी।

       रिया के पापा सरकारी बैंक में मैनेजर थे जब कि नवीन की माँ छोटे बच्चौ को ट्यूशन पढा़कर अपना गुजारा करती थी क्यौकि नवीन के पापा नहीं थे। उनकी एक सड़क दुर्घटना में मौत होगयी थी।

       एक दिन नवीन रिया से मिलने उसके घर पहुँच गया। नवीन की मुलाकात रिया के पापा से हुई। नवीन ने अपना परिचय देकर रिया से मिलने के लिए कहा।

       रिया के पापा को पहले से ही मालूम था कि नवीन कौन है उसका घर परिवार कैसा है ?

       इसलिए उन्होँने नवीन को समझाते हुए सलाह दी कि रिया को भूल जाओ। रिया के साथ तुम्हारा रिश्ता कभी नही होसकता है ।

        नवीन उनके इशारे मात्र को समझ गया और वह कालेज में रिया से दूर रहने लगा जब रिया को महसूस हुआ कि नवीन उससे दूर जारहा है तब एक दिन रिया नवीन से पूछ ही लिया," नवीन ! आजकल तुम कुछ बदलते जारहे हो। क्या बात है ?"

           तब नवीन ने उसके पापा वाली बात बतादी और रिया को भी दूरी बनाने की हिदायत देते हुए कहा," देखो रिया तुम्हारे पापा की बात सही है वह तुम्हारा हाथ मुझ जैसे छोटे  को कैसे दे सकते है हमें उनकी बात का बुरा नहीं मानना चाहिए। इस तरह हम एक अच्छे दोस्त सावित हो सकते है। वह तुम्हारे पिता है। वह तुम्हारा अच्छा ही सोचेंगे। वह तुम्हारा बुरा कभी नहीं सोच सकते है।"

         इस तरह नवीन रिया से दूर होता चला गया।जबकि रियाने  भागकर शादी करने की भी जिद की थी परन्तु नवीन ने मना कर दिया।

       इसके बाद रिया की शादी होगयी। नवीन को एक बडी़ कम्पनी में नौकरी मिल गयी। लेकिन कुछ समय बाद उसने नौकरी छोड़कर अपने शहर में ही अपनी दुकान करली  और आज वह एक शोरूम का मालिक बन गया था लेकिन  नवीन ने शादी नहीं की थी।

        आज अपने सामने रिया को देखकर बोला," तुम रिया हो सूरज अंकल की बेटी ?"

      "हाँ नवीन मै रिया ही हूँ?" रिया बोली  ।

       " तुमने अपना यह  क्या हाल बनालिया है? सब कुशल है?" नवीन ने पूछा।
           " हाँ सब ठीक ही है? " यह कहते हुए रिया का दर्द उसकी आँखौ से साफ नजर आगया।

      नवीन सब समझ गया कि रिया के साथ कुछ अनहौनी हुई है जिसे वह छिपा रही है। उसने रिया को अपने केबिन में बिठाया और ठन्डा पानी पिलवाकर उसका हाल पूछा।

      रिया ने जो कुछ बताया उसको सुनकर नवीन को बहुत दुःख हुआ। 

             रिया के पति को सट्टा लगाने की आदत थी और उसने अपनी और रिया के पापा की पूरी सम्पत्ति को सट्टे में लगाकर समाप्त कर दिया। इसी बीच रिया के पापा की मौत होगयी। इसके बाद रिया के पतिने भी कर्जे में डूबजाने के कारण आत्म हत्या करली। रिया कुछ दिन पहले ही यहाँ आई थी।और आज उसकी मुलाकात नवीन से होगयी।

       नवीन ने उसकी दर्द भरी  कहानी  सुनकर  उससे आज भी खुला आफरदेते हुए कहा," रिया इस दिल में मैने आज तक किसी को नहीं बिठाया है तुम्हारे लिए आज भी खुला आफरहै।

    रिया तो नवीन को दिल से चाहती थी और उसकी सलाह मानकर ही उसने शादी की थी। आज भी उसकी सलाह मानकर वह नवीन के साथ शादी करने को तैयार थी।

       इस तरह नवीन व रिया की शादी होगयी।  और वह फिर से स्कूल व कालेज की यादों  में खो गये।


आज की दैनिक प्रतियोगिता हेतु रचना।
नरेश शर्मा " पचौरी "

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6 Comments

Babita patel

29-Jun-2023 03:05 PM

nice

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वानी

25-May-2023 11:10 AM

Nice

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Abhinav ji

24-May-2023 09:30 AM

Very nice 👍

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